विद्या का भंडार तारा

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वैसे तो यह सम्पूर्ण जगत परमात्मा की लीला मात्र है।परमात्मा को हम निराकार एवँ साकार दोनों रूपों मे जानते-पहचानते हैं।कहा जाता है कि परमात्मा का कोई रूप और आकार नहीं है, वह आकार एवँ प्रकार से परे है, परंतु यह भी सच है कि वही परमात्मा साकार रूप मे भी लीलाएँ रचाया करता है।दश-महाविद्याओं के अंतर्गत द्वितिय महाविद्या परमात्मा की शक्ति तारा के नाम से जानी जाती है।जिसे नील-सरस्वती के नाम से भी पहचाना जाता है।शास्त्र कहता है कि एक हजार सरस्वतियों के बराबर एक नील सरस्वती होती है। ईश्वर या ब्रह्म की ज्ञान रूपिणी शक्ति तारा के नाम से विख्यात है।यह देवि ज्ञान की उपलब्धि सहज ही कराती हैं।बहुतेरे लोग इन्हें जागरणों में सुनाई जाने वाली तारा-रानी की कथा से सम्बद्ध करते हैं, पर यह तारा रानी से सर्वथा भिन्न है।तारा का स्वरूप काली के ही समान होता है परंतु भेद यह है कि काली श्याम वर्ण की होती है पर ये नीली होती हैं, मुण्डमाल तो दोनो ही धारण करती हैं पर तारा हाथों की करघ्नी की जगह शेर की खाल धारण करती हैं और तारा के हाथ मे कर्त्तरी यानि कैंची होती जो उन्हें काली से सर्वथा भिन्न बनाती है। यह कैंची बंधनों को काटने को प्रतिबिम्बित करती है। बौद्ध अनुयाईयों मे तारा की उपासाना बहुत प्रचलित है।कहा जाता है कि महर्षि वेद-व्यास ने तारा की उपासना बुद्ध से सीखी थी।

तारने वाली को तारा कहा जाता है।यानि जो भवसागर से तारे या उबारे, मुसीबतों, परेशानियों, विपत्तियों, विपरीत परिस्थितियों, इत्यादि से तारे उसे तारा कहते है। यानि जो हर संकट से तारे वही तारा कहलाती है।

  1. आजकल माता-पिता बच्चों की पढाई-लिखाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं।बच्चों को अगर आप सचमुच ज्ञान का भंडार बनाना चाहते हैं तो उन्हें ब्रह्म-विद्या तारा की कृपा प्राप्ति कराईए।मंद्बुद्धि बच्चे भी तारा की कृपा से कुशाग्र-बुद्धि हो सकते हैं।उनमें आत्म-विश्वास जागृत होगा, वाक-पटुता हासिल होगी।
  2. अगर किसी भी कारण से आपको विद्या अर्जन मे बाधा आ रही है।पढाई मे मन नहीं लगता है, एकाग्रता नहीं बनती, पढते-पढते मन कहीं और चला जाता है, यानि पढाई या ज्ञान पाने के मामले मे किसी भी प्रकार की कोई भी अडचन आ रही हो तो तारा की कृपा प्राप्ति आवश्यक है।
  3. हाईअर स्ट्डीस मे या अपने मन पसंद कोर्स या कालेज, इंस्टिट्यूट इत्यादि मे दाखिला ले पाने मे कठिनाई आ रही है तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  4. अगर यद्दाश्त की कमी है या भूलने की बिमारी है तो आप तारा की कृपा प्राप्त करके इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।
  5. अगर आपकि बुद्धि सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाती और आप हमेशा दुविधा मे ही रहते है तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  6. अगर आप अपने काम-धंधे मे सफल नहीं हो पा रहे हैं और आपको उबरने का या तरक्की का कोई रास्ता नहीं सूझ पा रहा हो, तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  7. अगर आपको या आपकी कुण्डली मे गुरू-दोष हो या गुरू अरिष्ट कारक हो, विद्या-दोष हो या सरस्वती दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त करें।
  8. आपकी बुद्धि जडित हो गई हो या कर दी गई हो, आपका ज्ञान सीमित हो गया हो या बृहस्पति का दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  9. आपको गुरू का श्राप, बद्दुआ, ऋण, इत्यादि हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  10. आपके हाथ मे मस्तिष्क रेखा खराब हो या दूषित हो या आप मूर्खता पूर्ण आचरण करते हों या आपके किए हुए चुनाव हमेशा ही आपको घाटे मे ले जाते हों तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  11. अंक शास्त्र के अनुसार अगर आपको मूलांक 3 की परेशानियाँ चल रही हों तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  12. वास्तु-शास्त्र के अनुसार अगर ईशन-कोण या उत्तर दिशा मे वास्तु दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  13. अगर आप हिसाब मे कच्चे हों या आपका गणित कमजोर हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  14. एसा कहा जाता है कि महर्षि वेद-व्यास ने तारा की कृपा से ही 18 महापुराणों की रचना की थी। तारा ज्ञान एवँ वाक-शक्ति का भंडार है। अगर आप वाक-पटुता पाना चाहते हैं तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  15. अगर आप एसी विपरीत परिस्थितियों मे फँस गए है जहाँ पर आप वर्षों प्रयास करने के बाद भी बाहर नहीं आ पा रहे हैं तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।

परंतु अब प्रश्न यह उठता है कि तारा की कृपा प्राप्ति कैसे हो? क्योंकि तारा की उपासना कोई बच्चों का खेल तो है नहीं। तारा की उपासना से प्रचण्ड शक्ति पैदा होती है जो सभी चक्रों को ऊर्जा से भर देती है, सभी कोषों को ऊर्जान्वित करके शक्ति से लबालब भर देती है।अगर इस शक्ति को सही से निर्देशित नहीं किया गया तो यही ऊर्जा विस्फ़ोट करके परेशानी भी पैदा कर सकती है।

तारा की कृपा प्राप्ति का सबसे सहज-सुलभ उपाय है कि इनकी साधना-सिद्धि, कृपा प्राप्त साधक से निर्देश प्राप्त किए जाएँ या उनके द्वारा सिद्ध किया गया यानि निर्मित किया गया यंत्र, कवच, मंत्र-जाल इत्यादि प्राप्त करके धारण किया जाए।साथ ही अगर ऐसे अधिकारी से पुखराज को तारा के यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, अनुष्ठान इत्यादि से शक्तिकृत करवाकर धारण किया जाए तो यह सोने मे सुहागे का कार्य करता है।(ध्यान रखिए अगर यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, अनुष्ठान, पुखराज, इत्यादि को सिद्ध अथवा शक्तिकृत करने वाला व्यक्ति अधिकारी यानि तारा की सिद्धि/कृपा प्राप्त नहीं है तो कोई फायदा नहीं होने वाला)

अगर आप भी तारा का सिद्ध यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, पुखराज, रत्न, इत्यादि प्राप्त करना चाहते है या निर्देश पाना चाहते हैं तो समय लेकर मिलें या 9213099525 पर संपर्क करें।

नोट:-श्री भूपेंद्र कुमार जी अधिकतर समय ध्यान/साधनाओं मे मग्न रहते हैं, मिलने के इच्छुक समय लेकर ही मिलें।

ब्रह्म-शक्ति तारा की कृपा आप सब पर हमेशा बनी रहे इसी आशा के साथ अभी के लिए आपसे विदा लेता हूँ। जय माँ तारा!

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