विद्या का भंडार तारा

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वैसे तो यह सम्पूर्ण जगत परमात्मा की लीला मात्र है।परमात्मा को हम निराकार एवँ साकार दोनों रूपों मे जानते-पहचानते हैं।कहा जाता है कि परमात्मा का कोई रूप और आकार नहीं है, वह आकार एवँ प्रकार से परे है, परंतु यह भी सच है कि वही परमात्मा साकार रूप मे भी लीलाएँ रचाया करता है।दश-महाविद्याओं के अंतर्गत द्वितिय महाविद्या परमात्मा की शक्ति तारा के नाम से जानी जाती है।जिसे नील-सरस्वती के नाम से भी पहचाना जाता है।शास्त्र कहता है कि एक हजार सरस्वतियों के बराबर एक नील सरस्वती होती है। ईश्वर या ब्रह्म की ज्ञान रूपिणी शक्ति तारा के नाम से विख्यात है।यह देवि ज्ञान की उपलब्धि सहज ही कराती हैं।बहुतेरे लोग इन्हें जागरणों में सुनाई जाने वाली तारा-रानी की कथा से सम्बद्ध करते हैं, पर यह तारा रानी से सर्वथा भिन्न है।तारा का स्वरूप काली के ही समान होता है परंतु भेद यह है कि काली श्याम वर्ण की होती है पर ये नीली होती हैं, मुण्डमाल तो दोनो ही धारण करती हैं पर तारा हाथों की करघ्नी की जगह शेर की खाल धारण करती हैं और तारा के हाथ मे कर्त्तरी यानि कैंची होती जो उन्हें काली से सर्वथा भिन्न बनाती है। यह कैंची बंधनों को काटने को प्रतिबिम्बित करती है। बौद्ध अनुयाईयों मे तारा की उपासाना बहुत प्रचलित है।कहा जाता है कि महर्षि वेद-व्यास ने तारा की उपासना बुद्ध से सीखी थी।

तारने वाली को तारा कहा जाता है।यानि जो भवसागर से तारे या उबारे, मुसीबतों, परेशानियों, विपत्तियों, विपरीत परिस्थितियों, इत्यादि से तारे उसे तारा कहते है। यानि जो हर संकट से तारे वही तारा कहलाती है।

  1. आजकल माता-पिता बच्चों की पढाई-लिखाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं।बच्चों को अगर आप सचमुच ज्ञान का भंडार बनाना चाहते हैं तो उन्हें ब्रह्म-विद्या तारा की कृपा प्राप्ति कराईए।मंद्बुद्धि बच्चे भी तारा की कृपा से कुशाग्र-बुद्धि हो सकते हैं।उनमें आत्म-विश्वास जागृत होगा, वाक-पटुता हासिल होगी।
  2. अगर किसी भी कारण से आपको विद्या अर्जन मे बाधा आ रही है।पढाई मे मन नहीं लगता है, एकाग्रता नहीं बनती, पढते-पढते मन कहीं और चला जाता है, यानि पढाई या ज्ञान पाने के मामले मे किसी भी प्रकार की कोई भी अडचन आ रही हो तो तारा की कृपा प्राप्ति आवश्यक है।
  3. हाईअर स्ट्डीस मे या अपने मन पसंद कोर्स या कालेज, इंस्टिट्यूट इत्यादि मे दाखिला ले पाने मे कठिनाई आ रही है तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  4. अगर यद्दाश्त की कमी है या भूलने की बिमारी है तो आप तारा की कृपा प्राप्त करके इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।
  5. अगर आपकि बुद्धि सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाती और आप हमेशा दुविधा मे ही रहते है तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  6. अगर आप अपने काम-धंधे मे सफल नहीं हो पा रहे हैं और आपको उबरने का या तरक्की का कोई रास्ता नहीं सूझ पा रहा हो, तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  7. अगर आपको या आपकी कुण्डली मे गुरू-दोष हो या गुरू अरिष्ट कारक हो, विद्या-दोष हो या सरस्वती दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त करें।
  8. आपकी बुद्धि जडित हो गई हो या कर दी गई हो, आपका ज्ञान सीमित हो गया हो या बृहस्पति का दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  9. आपको गुरू का श्राप, बद्दुआ, ऋण, इत्यादि हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  10. आपके हाथ मे मस्तिष्क रेखा खराब हो या दूषित हो या आप मूर्खता पूर्ण आचरण करते हों या आपके किए हुए चुनाव हमेशा ही आपको घाटे मे ले जाते हों तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  11. अंक शास्त्र के अनुसार अगर आपको मूलांक 3 की परेशानियाँ चल रही हों तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  12. वास्तु-शास्त्र के अनुसार अगर ईशन-कोण या उत्तर दिशा मे वास्तु दोष हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  13. अगर आप हिसाब मे कच्चे हों या आपका गणित कमजोर हो तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  14. एसा कहा जाता है कि महर्षि वेद-व्यास ने तारा की कृपा से ही 18 महापुराणों की रचना की थी। तारा ज्ञान एवँ वाक-शक्ति का भंडार है। अगर आप वाक-पटुता पाना चाहते हैं तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।
  15. अगर आप एसी विपरीत परिस्थितियों मे फँस गए है जहाँ पर आप वर्षों प्रयास करने के बाद भी बाहर नहीं आ पा रहे हैं तो आप तारा की कृपा प्राप्त कीजिए।

परंतु अब प्रश्न यह उठता है कि तारा की कृपा प्राप्ति कैसे हो? क्योंकि तारा की उपासना कोई बच्चों का खेल तो है नहीं। तारा की उपासना से प्रचण्ड शक्ति पैदा होती है जो सभी चक्रों को ऊर्जा से भर देती है, सभी कोषों को ऊर्जान्वित करके शक्ति से लबालब भर देती है।अगर इस शक्ति को सही से निर्देशित नहीं किया गया तो यही ऊर्जा विस्फ़ोट करके परेशानी भी पैदा कर सकती है।

तारा की कृपा प्राप्ति का सबसे सहज-सुलभ उपाय है कि इनकी साधना-सिद्धि, कृपा प्राप्त साधक से निर्देश प्राप्त किए जाएँ या उनके द्वारा सिद्ध किया गया यानि निर्मित किया गया यंत्र, कवच, मंत्र-जाल इत्यादि प्राप्त करके धारण किया जाए।साथ ही अगर ऐसे अधिकारी से पुखराज को तारा के यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, अनुष्ठान इत्यादि से शक्तिकृत करवाकर धारण किया जाए तो यह सोने मे सुहागे का कार्य करता है।(ध्यान रखिए अगर यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, अनुष्ठान, पुखराज, इत्यादि को सिद्ध अथवा शक्तिकृत करने वाला व्यक्ति अधिकारी यानि तारा की सिद्धि/कृपा प्राप्त नहीं है तो कोई फायदा नहीं होने वाला)

अगर आप भी तारा का सिद्ध यंत्र, कवच, मंत्र-जाल, पुखराज, रत्न, इत्यादि प्राप्त करना चाहते है या निर्देश पाना चाहते हैं तो समय लेकर मिलें या 9213099525 पर संपर्क करें।

नोट:-श्री भूपेंद्र कुमार जी अधिकतर समय ध्यान/साधनाओं मे मग्न रहते हैं, मिलने के इच्छुक समय लेकर ही मिलें।

ब्रह्म-शक्ति तारा की कृपा आप सब पर हमेशा बनी रहे इसी आशा के साथ अभी के लिए आपसे विदा लेता हूँ। जय माँ तारा!

सब कुछ केवल महामाया की ही माया है

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मेरे इस लेख से अगर किसी को किसी भी प्रकार से ठेस पहुँचती है तो मुझे अज्ञानी और अल्पज्ञ समझ कर माफ करें।मै एक तुच्छ प्राणी हूँ बस उस महामाया जगदम्बा भवानी की प्रेरणा पा कर कुछ भाव आपके सामने प्रस्तुत करने की हिम्मत कर रहा हूँ।मेरा मक्सद यहाँ पर किसी भी व्यक्ति, तकनीक इत्यादि को ठेस पहुँचाने का कदापि नहीं है क्योंकि हर एक वस्तु, व्यक्ति इत्यादि उस महामाया का ही रूप है।

आजकल एक अनोखा ट्रेन्ड चल पडा है कि एनर्जी हीलिंग सिखाने वाले लोग चाहे वे रेकी, थेटाहीलिंग या किसी अन्य प्रकार की हीलिंग तकनीकें सिखाने वाले हों जिसमें प्रकाश के द्वारा हीलिंग की जाती है अपने शिष्यों को देवी-देवताओं पर से विश्वास हटा कर केवल प्रकाश पर ही सम्पूर्ण ध्यान टिकाने को कहते हैं (इस पंक्ति मे मैं भी कभी शामिल था)। धीरे-धीरे एनर्जी हीलिंग सीखने वाला व्यक्ति या तो इस नई तकनीक से पीछे हट जाता है या धार्मिक क्रियाओं को ही ढोंग समझने लगता है।इन विद्याओं को सीखने वाले व्यक्ति का दिमाग धार्मिकता के प्रति पूर्ण रूप से साफ कर दिया जाता है और उसके दिमाग मे यह भर दिया जाता है कि रेकी,थेटा,एल्फा,गामा,बीटा इत्यादि के सिवाय और कुछ नहीं है।रेकी, थेटाहीलिंग या अन्य उपचार की तकनीकें सिखाते ही उसे यह कह दिया जाता है कि अब वो पूर्ण हुआ और उसे अब कुछ और सीखने की जरूरत नही है।उसने सबसे ऊँची शक्ति से सम्पर्क जोड लिया है और वह जो चाहे सो पा सकता है।कुएँ के मेंढक की तरह उसके ज्ञान को बाँध कर सीमित कर दिया जाता है ताकि वह उनके हाथ से न निकल जाए। क्योंकि ऐसा होने पर उनकी आमदनी घट जाएगी।

यहाँ भारतवर्ष में रेकी, थेटाहीलिंग या अन्य उपचार पद्धतियाँ सिखाने वाले अपने आपको गुरू जी या गुरू माँ कहलवाने तक से पीछे नहीं हटते, चाहे उन्हें अपने शिष्य के प्रश्न पूछने भर से ही गुस्सा आ जाता हो और वे तिलमिला कर उसे बस केवल उनकी बातें सुनते रहने का निर्देश दे देते हों।क्या आपने इतिहास मे कभी किसी ऋषि-मुनि, साधु, तपस्वि, योगी या देवी-देवता विशेष को रेकी, थेटा या अन्य उपचार करते हुए सुना है या तस्वीरों मे देखा है? कि वे अपने पास आए सवाली या शिष्य के समक्ष या पीछे से रेकी की मुद्रा बनाते हुए रेकी भेज रहे हों? या अपने शिष्य का बिलीफ सिस्टम ठीक कर रहे हों? किसी वेद-पुराण, उपनिषद या श्रुति-स्मृति शास्त्र मे आपने रेकी या बिलीफ सिस्टम ठीक करने का वृतांत सुना है? यहाँ अगर हम थेटाहीलिंग की बात करें तो बीलीफ सिस्टम को चार लेवेल यानि स्तरों पर ठीक करना बताया जाता है। इन चारों स्तरों मे आत्मा का लेवल अथवा स्तर भी शामिल है।शास्त्र कहता है कि आत्मा ही परमात्मा है।अगर आत्मा ही परमात्मा का अंश है तो भला आत्मा मे कौन सा बिलीफ सिस्टम पैदा हो रखा है जिसे ठीक करना शेष रह गया है और वह भी एसा कि बार-बार ठीक करना पडता है? परमात्मा का अंश यानि आत्मा तो अजर-अमर है वह मृत्यु से परे है वह तो शरीर कपडों की तरह बदलती है उसे भला कोई क्या सिखाएगा?

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healings with god भक्त ध्यानू ने कौन सा एल्फा, बेटा, गामा, थेटा, इत्यादि किया कि राजा अकबर के द्वारा ज्वाला जी माँ भगवती की शक्ति की परिक्षा लेने पर अकबर के द्वारा काटे गए घोडे का शीश जुडवा दिया। और जब अकबर ने ज्वाला जी मंदिर मे सोने का छत्र चढाने से पहले अहंकार वश शब्द बोले कि मेरे जैसा सवा मन सोने का छत्र आज तक तेरे दरबार पर किसी ने भी न चढाया होगा बस यह कहते ही वह सोने का छत्र नीचे गिर कर टूट गया तथा आज तक किसी अन्जान धातु मे बदल कर ज्वाला जी दरबार में पडा हुआ है वह किस एल्फा, बीटा, गामा, थेटा हीलिंग के कारण हुआ यह आज तक समझ मे नहीं आता?

healings with godकाँगडा जी स्थित ज्वाला जी दरबार मे ज्वाला जी की नौ ज्योतें जो बिना तेल और बाती के युगों से जलती हुई आ रही है जिसे अकबर ने बुझाने के लिए सोने के मोटे-मोटे तवे चढवा कर बुझाने की चेष्टा की पर वो तवे फाड कर बाहर आ गई। फिर नहर के पानी का रुख ज्योत की तरफ मोड दिया गया पर ज्वाला तब और प्रचंड होकर तब भी जलती रही और आज भी लगातार जल रही है यह किस एल्फा, बीटा, गामा, थेटा हीलिंग के कारण हुआ यह एक अच्छा शोध का विषय बन सकता है। क्योंकि इतिहासकार एवँ साईन्टिसटों ने तो अपनी-अपनी रिपॉर्टों मे शोध करके घोषणा कर दी है कि हमे नहीं पता कि ज्वाला जी स्थान पर अग्नि कैसे प्रज्वलित हो रही है उसका स्रोत क्या है और जो छत्र है वह किस अंजान धातु का हो गया है।

एंशिएंट इंडियन हिस्ट्री यानि भारतीय प्राचीन इतिहास के छात्रों ने जरूर पढा होगा कि मुस्लिम इतिहासकार ने मैं उसका नाम भूल रहा हूँ ने लिखा है कि चिंतपूर्णी, ज्वालाजी एवँ नगरकोट इत्यादि पर नवरात्रों के समय हिंदू लोग जमा होते हैं और कई लोग अपना हाथ, कान, पैर इत्यादि को काट कर चढा देते हैं किसी का उसी समय, किसी का आधे-एक घण्टे मे, 2 या 4 या 12 और हद से हद 24 घण्टे मे वह अंग वापस आ जाता है। अब मैं यह सोच कर हैरान हूँ कि यह किस एल्फा, बीटा, गामा, थेटा हीलिंग के कारण एसा घटित हुआ होगा उत्तर दे पाना असम्भव जान पडता है।

पीर-फकीर, औलिया-पैगम्बर, जति-योगी इत्यादि जैसे कि वेद-व्यास, आदि शंकराचार्य, गोरखनाथ, ख्वाजा पीर, साईं बाबा, जीजस, जैसी जमात के तप से भरे हुए महापुरूष जो गुरू रूप में उपस्थित हैं ने पता नहीं कौन सा एल्फा, बीटा, गामा, थेटा सीखा जान नहीं पडता। ज्वाला जी मे तो गोरख डिब्बी मे माँ ज्वाला के प्रताप से गुरू गोरखनाथ ने पानी उबलवा दिया जो आज तक उबल तो रहा है पर ठण्डा पडा हुआ है। पर मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि यह उन्होने कौन से अल्फा, बीटा, गामा, थीटा की मदद से किया। मैं अज्ञानी तो नहीं समझ पा रहा हूँ पर आप में से अगर कोई समझा पाए तो मै आपका अति अभारी रहूँगा।

अगर बात करें शंकराचार्य की तो दुर्गा-चालीसा मे आता है

‘शंकराचार्य तप कीन्हो, काम औ क्रोध जीति सब लीन्हो।

निशदिन ध्यान धरो शंकर को, काहू काल नहीं सुमिरो तुम्को।

शक्ति रूप को मरम ना पायो, शक्ति गई तब मन पछितायो।

यानि श्रीमद आद्य शंकराचार्य जी ने तप करके काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या इत्यादि को जीत लिया।वे हर समय भगवान शंकर जी का ही ध्यान किया करते रहे परन्तु आपके यानि शक्ति के मर्म को ना पहचानने के कारण किसी भी समय आपका सुमिरण नहीं कर पाए।इस संदर्भ में वृतांत आता है कि शंकराचार्य वेद-वेदांत के अकाट्ट्य विद्वान थे।वे काशी मे शंकर जी को सर्वोपरि स्थापित करने के उद्देश्य से पधारे। उनके केवल घोषणा मात्र से शिव को सर्वोपरि स्थान मिलकर शक्ति का वर्चस्व क्षीण हो जाता। परंतु महामाया के आगे किसकी चली है, जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी उनकी माया मे घिरे रहते हैं तो हम जैसों की क्या औकात।उसने आदि शंकराचार्य को भी मोहित कर दिया।उनके घोषणा करने से ठीक पहले ही उन्हे दस्त लग गए और वे निढाल होकर काशी मे गंगाजी के किनारे गिर पडे अब उनमें इतनी भी शक्ति नहीं बची कि जल तक पी सकें। तब वो महामाया भगवती महात्रिपुर सुंदरी सोलह वर्ष की नई-नवेली दुल्हन का रूप धरकर गंगा जी से अपने सिर पर मटकों मे जल भरकर आचार्य शंकर के सामने उन्हें माया से मुक्त करने के उद्देष्य से गुजरी।शंकराचार्य जी की नजर उन पर पडी और उन्होंने कहा ‘हे देवि मेरे मुख मे जल डाल दीजिये’ तब महात्रिपुर सुंदरी ने उत्सुकतावश पूछा ‘क्यों! तुम खुद जल नहीं ले सकते?’ तब शंकराचार्य जवाब देते हैं ‘हे देवि! मुझमे शक्ति नहीं है’ नयनों में आश्चर्य का भाव लिए देवि कहती हैं ‘कौन! वो शंकर! जो कहता है कि शक्ति कुछ नहीं होती केवल शंकर ही होता है, अब उसकी शक्ति कहाँ चली गई’ और मुस्कुरते हुए वो अलोप हो गई। तुरंत ही शंकराचार्य जी को शक्ति के मर्म का ज्ञान हुआ और तब ‘शरणागत हुई कीर्ति बखानी जै जै जै जगदम्ब भवानी, भई प्रसन्न आदि जगदम्बा दई शक्ति नहीं कीन्ह बिलम्बा’ यानि शंकराचार्य जगदम्बा भवानी महात्रिपुर सुंदरी के शर्णागत हुए और उनकी कीर्ति का बखान किया। ऐसा करते ही देवि ने प्रसन्न होकर बिना देर लगाए उन्हें शक्ति प्रदान करके स्वस्थ कर दिया। अब यहाँ कौन सा अल्फा, बीटा, गामा, थीटा चला जान नहीं पडता।

रेकी अल्फा, गामा, बीटा,थीटा इत्यादि सिखाने वाले काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या रूपी रक्षसों  पर विजय प्राप्त करने के बारे मे कुछ बता नहीं पाते बल्कि अपनी बात मनवाने के लिए चोकूरे, रेकी के सिम्बल इत्यादि का उपयोग करना सिखाते हैं, कि वही एक धर्मात्मा है। वे काम,क्रोध,अहंकार रूपी रक्षसों पर विजय प्राप्ति के बारे मे इसलिए नहीं बता पाते क्योंकि यह विषय उनकी पहुँच से बाहर है।

 

मैं अल्फा, बीटा, गामा, थीटा वालों से पूछ्ना चाहता हूँ कि आप लोग आतंकवाद को, कॉरप्शन को चोकूरे मार कर क्यों नहीं खत्म कर देते हैं? मैं जानता हूँ कि ऐसा सम्भव नहीं हो सकता क्योंकि सब कुछ चाहे अच्छा है या बुरा उसी परमात्मा की माया का ही खेल है। बिना बुराई के आप अच्छाई की कल्पना भी नहीं कर सकते। अंत मे केवल यही कहकर इस लेख को विराम देता हूँ कि सब कुछ केवल महामाया का ही खेल है वही इस संसार को पैदा करती है, पालन करती है और अंत मे विनाश कर देती है।उसकी लीला को और गहराई से समझने के लिए ही उसकी प्रेरणा के द्वारा दुर्गा-हीलिंग की रचना हुई जिसमे यह सीखने का अवसर मिला कि निराकार परमात्मा और साकार परमात्मा मे लेश मात्र भी अंतर नहीं है।बल्कि अल्फा, बीटा, गामा, थीटा, इत्यादि उस महामाया की माया का एक सूक्ष्म सा अंश मात्र है। पूर्णता हासिल करने के लिए उससे दूर होने की जरूरत नहीं है बल्कि उससे और ज्यादा गहराई से जुडने की जरूरत है।

नोट:- श्री भूपेंद्र कुमार जी ध्यान एवँ साधनाओं मे मस्त रहते हैं, उनसे मिलने के इच्छुक कृप्या समय लेकर ही मिलें।अधिक जानकारी के लिए 9213099525 पर सम्पर्क करें या http://www.healingswithgod.com/

भक्त ध्यानू, ज्वाला जी और अकबर के छत्र की काहनी जानने के लिए इन लिंक्स पर क्लिक करें

http://www.3marg.info/pilgrimages/maa-jwalaji-temple/history-akbar-dhyanu-bhakt.shtml

https://en.wikipedia.org/wiki/Jawalamukhi

Increase Psychic Powers with “HealingsWithGod”

Increase Psychic Power

Every person has some inborn qualities. Few people are strongly blessed with one of their psychic power whilst, others need some practices to improve and increase psychic powers. There are many spiritual skills are available those are extremely helpful for this. In this write-up, you will get the most effective ways to improve your psychic powers.

Easiest ways to Increase Psychic Powers:

Learning about the ways to develop psychic abilities is easier and simpler than you might imagine. These ways are:

  • Trust: Negative thoughts are the biggest enemy of your psychic powers. Let yourself to believe in your own inborn natural powers. Read good stories and discover encouragements wherever and whenever you can. Always put your 100% efforts.
  • Keep a positive attitude always: An attitude with lots of positivity is must if you want to increase your psychic power. You can follow a hobby in which you can enjoy with your heart. In order to obtain and increase the psychic abilities, you have to throw out all the negativity from your mind. Always maintain a smile on your face. It is the easiest and cheapest way to stay positive all the time.
  • Take a deep relaxation: Meditation is the best way to achieve the deepest relaxation. Meditation is helpful to make your brain clearer but also assists you to change the patterns of your brain waves. Meditation is the greatest way to reduce the stress. Do meditation and release all your stress to get deep relaxation.
  • No more fears: If you want to perform something good, you have to overcome from your fears. Believe on all the fine things you can do with this kind of power and it might not look so frightening.
  • Polish your abilities and develop your imagination: Distant viewing is the psychic power to visit places spiritually without being there actually or physically. Perform by visualizing each place you want to visit. Anything from the general store or your relative’s house will work. Imagine you are at that place before going to sleep. Dreaming is also very helpful to enhance the psychic powers and energy healing therapy. You just need to write down your dreams to keep them fresh in your mind.

Increasing and developing psychic powers are full of fun and stress free. Determination and dedication are the two major keys in order to increase psychic powers. These practices will take the long duration so don’t be annoyed. Give some time to your journey and wait for the best results.

Have some patient and stay positive. Self confidence and positive attitude will help you to get your aim as soon as possible. But, yes you have to give your efforts with your heart to obtain good results in less time.

3 Easy and Simple Ways to Increase Psychic Power

Increase Psychic Power

Life is very fast and competition is very high. In this rapid world, you cannot live tension free. Due to stress we missed many opportunities in our life. For this, you have to know about your psychic powers to face the real world. We all have that spark which is known as physic power or ability. By using different and effective ways, we can recognize our psychic abilities very easily.

Three best ways to increase psychic power 

How to increase psychic power, this is the only question raised in our mind while we discussed about the methods for psychic power. Most effective ways to increase psychic power are:

  • Throw out all negativity and doubts: Negative thoughts are the biggest enemy of your psychic abilities. Just believe in yourself and flush out the doubts from your mind as well. Try to keep up your faith on yourself and you will surely meet your goals. To banish your negative thoughts and doubts, you can find inspirations around you. Cent percent efforts are must and if you have positive attitude and clear mind set, you can invest 100% efforts easily.
  • Meditation: A relaxed mind is must for the successful life. If you want to increase your psychic power, say hello to meditation. This is the best practice for mental and physical wellness. Regular practice of meditation will help you to improve your physical health and boost your psychic power.
  • Make your imagination powers larger: Imagination is an important practice to shape up your psychic power. A good level of your imagination ability is the easiest way to improve your psychic abilities. You can simply start this process by imagining the places that you desire to go for the vacation and so on. You can also do this by remembering all the dreams. Dreaming and imagination, both are best for psychic power.

There are two very important factors to increase and improve the psychic ability and they are determination and focus. If you are determined and focused, you can get anything in your life. Be patient and have some faith on your abilities. This will help you to meet your dreams and aim.

Meditation Can Heal Your Body and Mind

energy healing

Stressed mind or high workload? Just give yourself few minutes from your busy schedule and feel good.

In this busy world, no one bothers to give time to maintain their body and mind well in proper way. People are stressed because of high workloads or may be because of some personal problems. Everyone is running here or there. Our tiredness and stressful behavior leads to the number of problems such as anger, frustration, unhappiness, mixed emotions, confusions etc. You may not be aware of the fact that such problems lead to number of health problems. Lot of frustration makes the person insomniac which in turn is harmful for health. Meditation is the best way to relax yourself from your busy schedule which not only provides you inner peace but also helpful for your health. Energy Healing is the widely used therapy which is used for healing the person physically as well as emotionally. Various Energy Healing Courses are being taken by number of professionals working under high workloads and other people to energize and for attaining inner peace.

Energy Healing Therapy increases the energy level of people and helps to remove distractions from minds of people. There are various kinds of techniques which come under Energy Healing Therapy. Therapies for Energy Healing have been there from ancient time but all those techniques now have been improved with modern techniques.
As soon as these therapies are being introduced to people, people are becoming more curious for it. More and more Energy Healing Courses are adopted by working professionals to get relaxed from stressful schedule.

Some of the benefits of Energy healing are explained as follows:

i) Deep relaxation is provided to the mind and body which helps in releasing worries and stress.
ii) Self healing abilities of body are accelerated.
iii) Beneficial gets sound and proper sleep.
iv) No more high or low blood pressure problem.
v) Harmful addictions of drugs and smoking can be removed with the help of techniques of Energy Healing.
vi) Immune power of the body gets increased.
vii) Spiritual and emotional growth gets better.
viii) Vibrational frequency of the body gets raised up.

If a person is free from any kind of stress and worries, then only he/she may be able to do any tasks effectively. No person is able to do any task effectively under stress and pressure. So, it is important that to live a quality and healthy life, living stress free is very important. Energy Healing Course has helped a lot in reducing stress and worries from human’s lives.

bhairava consciousness

Are you ready to achieve Bhairava Consciousness?

healings with godAre you free from fears of the death? Are you free from the worries of the future? I am asking these straight questions just to draw your attention towards the hidden aspect of yourself, which is really your true-self in the form of Bhairava.When this Bhairav is awakened you start to live your life to the fullest.At that time you are in total bliss and the saying ‘I am shiva’ or ‘aham brahmasmi’ is being fulfilled.You are then free from the fears of death and the worries of the future.

Who is Bhairava? Bhairav is the fierce form of shiva signifying the commanding nature of our true-self which is fearless and the height of bravery.

Without realizing your true self in the form of Bhairav you can’t come out of the fears of death.It is the fear of the death which is keeping you away from realizing your real-self.Your true-self is free from the fears of death.Actually it is the creator and the destroyer of the death.

Bhairav has many forms signifying the spectrum of the various emotions of the fearlessness or bravery.Asht-bhairav or the eight forms are most prevalent.When you realize yourself in the form of bhairava consciousness, you will then witness Mahakali being seated on your lap, fulfilling the desires because she is his consort.And you will then achieve the fullness.Your couple is incomplete without this union.

healings with god

Follow me to grasp this wisdom and to complete your union.You can start with ‘Healings with God’ course.Call me now on:- 9213099525.

A call for Introspection

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This is a call to all of the esteemed learners of the basic course of ‘Healing with God’. Just think of the time before you came into this learning. Most of us had a feeling that we are lost in a world full of pain and sufferings, as though we will never be able to come out of this experience, and that we are the puppets at the hands of the karmas. We held on to the ideology that we must repay our karmas so that we can end our sufferings and enjoy a peaceful life. Most of us were caught in the illusion of the law of karma, right and wrong, true and false, past lives and future lives, etc. Many amongst us were the regular followers of the rituals to please the grahas, deities, gurus and god men, to remove the astrological ill effects, to avoid the negative forecasts of the future. Most of the people amongst us were devoid of the good health and some even away from their true love and were struggling to win back their dear ones.

And then there came a time when after learning and implementing this knowledge, most amongst us were able to gain good health, got the true love in their lives, the few amongst us who were struggling to get their dear ones won them back in their life. The most spectacular thing that happened in our life was that we burst the illusion of the law of karma, good and bad, right and wrong, true and false, past lives and future lives, etc. We got the knowledge that now we no more have to please anyone because we ourselves are the ultimate creator of everything, whether it’s good or bad, high or low, black or white. We got the wisdom how to create the experience we desire. Worries of the ultimate goal to find the God and enlightenment fell apart. Unconditionally, we started to enjoy our life to the fullest.

Tell me, how relieved were you with the knowledge you gained at that time? Most amongst us at that time felt liberated, as if they were free from the bondages of struggles, sufferings and pain. All were on cloud nine, experiencing that they have got almost everything in their lives. If we compare our life now and then most of us will say that it has been a major turn of 180 degrees.

My purpose here in bringing up all this is call for an introspection and ask yourselves how it will feel if your loved ones and all of the people connected to you also have the same experience that you had when you were on cloud nine. How will you feel if they also get the same benefits you gained after learning this knowledge?
Remember, in the course you learned that you are everything because you are God. If you are God, which implies ‘everything’, then please disseminate this knowledge to liberate others because they are a part of yourself and somewhere is hidden a part of you that is struggling to burst the illusion of pain and sufferings. Have mercy upon them and pull them out of the illusion of pain, sufferings, struggles and create the experience of joy, happiness and bliss.

You might ask yourself how you can create the experience of Joy, happiness and bliss in the life of others. The answer is simple. Join the Basic Instructor’s/ Teacher’s course of ‘Healing with God’ and spread this knowledge to the masses who are eagerly waiting to learn this experience from you.

Vivah kee neev prem

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विवाह की नींव प्रेम

हर वैवाहिक स्त्री पुरुष सुखी व आनंदमय जीवन जीने की कल्पना व कामना करते हैं, वह इसे पाने के लिए भरपूर प्रयास भी करते हैं पर देखा गया है की अथक कोशिशो के बाद भी ऐसा कर पाने में वे असफल रहते है| सुखी वैवाहिक जीवन की नीव स्त्री और पुरुष रूपी जोड़े पर टिकी होती है, निम्नलिखित कथा में भी अमन और राशि उसी जोड़े को इंगित कर रहे हैं

आज अमन बहुत खुश था क्योंकि उसके ऑफिस में सभी काम समय से पहले खत्म हो गए थे, उसके बॉस नें सबके सामने आज उसके काम की जम कर तारीफ की, इस वजह से आज अमन हर्षित था क्योंकि बहुत समय के बाद सब काम जैसा वह चाह रहा था वैसे ही हो रहे थे|आज वह घर जाकर इस ख़ुशी को अपनी पत्नी राशि के साथ सेलिब्रेट करना चाहता था| उसे अपनी शादी के शुरुआती दिनों के खूबसूरत पल याद आ रहे थे| वह यही सोच रहा था की आज तो उसकी पत्नी खुश होकर उसकी तारीफों के पुल बाँध देगी और खूब प्रसन्न होगी| उधर घर पर अमन की पत्नी राशि का दिन बहुत ही खराब था क्योंकि आज काम वाली बाई नहीं आई थी और उसके इन्तेजार करने के बाद राशि को सारा काम खुद निपटाना पड़ा, वह सोच रही थी की अगर बाई पहले ही कह देती तो काम समय पर ख़त्म हो जाता| अभी वह काम से पूरी तरह निपटी भी नहीं थी की उसकी माँ का फोन आ गया और उसे पता चला की उसका छोटा भाई अभी भी कुछ काम नहीं कर रहा है बल्कि माँ बाप को शराब पीकर तंग करता है, और इस बात पर आज भी वहां पर कलेश हुआ है, और पिताजी आज फिर घर से रूठ कर चले गए हैं| राशि आज खूब गुस्से में है क्योंकि वह सोच रही है की अमन अगर खूब अमीर होता, या उसका अपना कोई बड़ा कारोबार होता तो आज वह उसे अपने काम-धंधे में सहारा देकर इस परेशानी को हमेशा के लिए समाप्त कर देती, परन्तु वह कैसे इस समस्या का हल करे क्योंकि अमन तो खुद ही एक नौकरी करता है|

शाम को अमन ने जैसे ही अपने ऑफिस के बारे में बताना शुरू किया, राशि ने गुस्से में भर कर कहा की तुम्हें तो अपनी खुशियों के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देता, हमेशा अपनी नौकरी को ही महत्त्व देते हो, तुम्हें तो मेरी कोई परवाह ही नहीं है, कब तक ऐसे ही नौकरी करते रहोगे, कोई बड़ा काम क्यों नहीं करते जिससे  खूब  पैसा  मिले, अमन को राशि से इस तरह की उम्मीद नहीं थी| अमन भी भड़क गया क्योंकि उसके साथ  ऐसा कई बार पहले भी हो चुका था की जब भी वह अपनी पत्नी से प्रेम की उम्मीद करता था उसके जीवन में कलह जरूर होता था, और उधर राशि भी दुखी थी क्योंकि अमन से उसने जो उम्मीदें लगा राखी थी वो पूरी नहीं हो पा रही थी|अमन और राशि के इस तरह के रोज-रोज के कलह कलेश से घर एक युद्ध का मैदान बन कर रह गया और उनका वैवाहिक जीवन परेशानियों से घिर गया और आखिर एक दिन गुस्से में आकर अमन ने कह ही दिया की इससे तो अच्छा है हम दोनों अलग हो जाएं क्योंकि अब यही एक उपाय बचा है…….सुख उन दोनों के लिए एक कल्पना बन कर रह गया|

वैवाहिक जीवन यदि सुख व आनंद से भरपूर होता है तो जीवन जीने का मजा ही कुछ और होता है इसके विपरीत यदि वैवाहिक जीवन में रोजमर्रा की कलह, कष्ट,धन-धान्य का आभाव,लड़ाई झगड़ा,मन-मुटाव,इत्यादि हो तो जीवन नरक सामान हो जाता है|पति पत्नी एक दुसरे के शत्रु तक बन जाते हैं बात कोर्ट कचेहरी तक पहुँच जाती है भरसक प्रयासों के बाद भी एक हँसता खेलता परिवार बिखर जाता है,टूट जाता है|ऐसी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा अहित बच्चों का होता है वे माता पिता से दूर रहने को विवश हो जाते हैं उनके प्यार से वंचित रह जाते हैं| यहाँ प्रश्न यह उठता है की इस संसार में वैवाहिक जीवन में सुखी रहना क्या इतना कठिन है या वह सुख हम कभी पा ही नहीं सकते आखिर हम अपने आप को इतना असहाय व लाचार समझने लगते हैं की सुख हमें मृग मरीचिका समान दिखाई पड़ता है की जिसे पाने के लिए हम चलते चले जाते हैं पर वह हमरी पहुँच में कभी आ ही नहीं पाता| ऐसे हालत में पति पत्नी तरह-तरह के उपाय खोजते हैं| जिनमे कर्म-कांड, पूजा-पाठ, व्रत-उपासना इत्यादि आम हैं| कई बार इन उपायों से सुख प्राप्त भी होता है पर ज्यादातर मामलों में असफलता ही हाथ लगती है,…… प्रेम ही ईश्वर है, अगर ईश्वर की पहचान हो जाये तो प्रेम की पहचान अपने आप ही हो जाती है……अगर अमन और राशि ने ईश्वर को पहचान लिया होता तो प्रेम की पहचान अपने आप ही हो जाती और उनके जीवन में ऐसी परिस्थितिया कभी उत्पन्न ही नहीं होती……ईश्वर या प्रेम को हीलिंग्स विध गॉड कोर्स के द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है और वैवाहिक जीवन को सुखी बनाया जा सकता है…..अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

 

guru

सर्वोपरि गुरु

guru

अर्थ:-शिष्य कहता है की यदि गुरु और ईश्वर एक स्थान पर खड़े हों तो वह गुरु के चरणों को पहले स्पर्श
करेगा क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर की प्राप्ति करवाई है|

हर गुरु यही चाहता है की उसका शिष्य केवल शिष्य ना बना रहे बल्कि वह गुरु बन जाये.कहते हैं की पारस तो लोहे को सोना बनाता है पर गुरु उससे भी ऊंचा होता है क्योंकि वो शिष्य को स्वयं समान यानी अपने सामान ही बना देता है|इसलिए गुरुओं की महत्ता सर्वोपरि है|ईश्वर को पाने के लिए गुरु का ज्ञान अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरुजन ईश्वर को प्राप्त करने की विधियाँ बताते हैं|गुरुओं के आदर सम्मान के लिए व्यक्ति उनकी पूजा इत्यादि किया करता है ताकि वे प्रसन्न हो जाएं और उनके जीवन में उन्नति प्रदान करने के साथ साथ ईश्वर की कृपा भी प्राप्त करवा दें|परन्तु क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है की गुरु वास्तव में आपसे क्या चाहते हैं?

गुरु वास्तव में यही चाहते हैं की

1.उनका शिष्य आध्यत्मिक ऊंचाइयां प्राप्त करे|

2.स्वयं की पहचान करे की वह कौन है|

3.ईश्वर को प्राप्त करे|

4.अपने जीवन की सभी कठिनाइयों को दूर करके स्वस्थ और सुखी जीवन का आनंद प्राप्त करे|

परन्तु आज ऐसा देखा जा रहा है की व्यक्ति गुरु के बताये हुए उपदेशों को अक्षरशः पालन नहीं कर पा रहा है|जिसके विभिन्न कारण हैं जैसे समय का अभाव, आधुनिकता की चकाचौंध में व्यस्तता, आध्यात्मिक ज्ञान सहज ही उपलब्ध ना हो पाना, ईश्वर प्राप्ति के लिए कठोर नियमो-विधानों का पालन करना,इत्यादि

यदा-कदा ऐसा देखने में भी आया है,कई बार अच्छे गुरु की तलाश में व्यक्ति धोखा भी खा जाता है| इसलिए एक श्रेष्ठ गुरु का मिल पाना भी किसी कोहिनूर हीरे को पाने से कम नहीं है|इसलिए अच्छे गुरु की तलाश में व्यक्ति निरंतर प्रयासरत  रहता  है ताकि  वह  अपने  जीवन को संवार सके|ऐसे में अगर गुरु का वास्तविक ज्ञान जो यह सिखा दे और अनुभूति करा दे की वास्तव में हम कौन हैं और हम कैसे अपने जीवन की विभिन्न परेशानियों को दूर कर सकें तो यह वास्तव में उन गुरुओं की कृपा ही होगी|यहाँ पर हर्ष का विषय यह है की यह गुरु रूपी चमत्कारिक ज्ञान हीलिंग्स विध गॉड के रूप में सहज ही उपलब्ध है, जरूरत है तो सिर्फ इसे सीखने की और इसे अपने जीवन में उपयोग करने की|अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें|

chamtkari man

healings with god dohaसदियों से ऋषि,मुनि,वेद-शास्त्र मन के बारे में चर्चा करते आ रहे हैं| मानव मन अत्यंत शक्तिशाली है इसके द्वारा केवल शरीर ही नहीं बल्कि ब्रह्माण्ड भी संचालित होता है| मन के द्वारा ही मनुष्य जीवन पूरी तरह संचालित होता है| सभी कार्यों को मन ही सिद्ध करता है| शास्त्रों के अनुसार “एक ही साधे सब सधे” यानी एक मन को ही साध लिया जाए तो सारे कार्य स्वयं ही सिद्ध हो जाते हैं|लेकिन मन को जानने व उसे साधने की प्रक्रिया इतनी सरल भी नहीं है| यहाँ तक की मन को जानने व साधने के पीछे एक जीवन नहीं बल्कि अनेकों जन्म तक लग जाते हैं पर मनुष्य इस कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता| हम मन को जितना साधने की कोशिश करते हैं वह हमारी पकड़ से उतना ही दूर होता जाता है|आध्यात्मिकता में तो सारे कार्यों की सिद्धि के पीछे मन ही एक कारक बताया गया है| किसी भी कार्य को करने के पीछे सबसे पहले विचार मन में ही आता है| सृष्टि के प्रारम्भ से ही मन की महानता का गुणगान होता आ रहा है मन को साधना उसे स्वयं की मर्जी से संचालित कर पाना आसान ही नहीं नामुमकिन भी लगता है क्योंकि इस मन को साधने की प्रक्रियाएं,विधियां इतनी कठिन व कष्टकारी बताई गई हैं की मनुष्य चाह कर भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता मन को ठीक करने के लिए ही व्यक्ति पूजा,पाठ,भक्ति,व्रत,उपासना,ध्यान, इत्यादि करता है पर इतने प्रयासों के बाद भी उसे असफलता मिलती है मन के महत्व व उसके कार्य को और अधिक गहराई से जानने के लिए एक छोटी सी कथा का वर्णन करना आवश्यक हो गया है|
एक बार एक साधू चक्रवर्ती सम्राट के राज्य से गुजर रहे थे|राजा को जैसे ही इस बात का पता चला राजा स्वयं उस साधू को अपने महल में ले कर आ गए और उनका राजघराने के अतिथियो जैसा सम्मान और स्वागत किया|राजा ने हर तरह से सेवा करके उस साधू को प्रसन्न कर दिया|चलते समय साधू ने प्रसन्न होकर राजा को इच्छित वार मांगने को कहा तो राजा ने कहा की मुझे ऐसी वास्तु प्रदान करें जिसके द्वारा मैं जिस मुझे जिस भी कार्य को कराने की इच्छा हो वह पूरी कर दे| साधू ने प्रसन्न होकर उस राजा को अपना एक यक्ष (देवता विशेष) प्रदान किया और निर्देश दिया की इसे कोई न कोई कार्य अवश्य देते रहना क्योंकि अगर इसे कोई कार्य नहीं दोगे तो यह तुम्हें खाने को दौड़ेगा और अगर तुमने उसे ज्यादा समय तक काम नहीं दिया तो यह तुम्हें मार डालेगा और इतना कह कर वे साधू दूसरे राज्य में चल दिए|वापसी में साधू राजा का हाल जानने के लिए फिर से उसी राज्य से गुजरे|साधू को देखते ही राजा उनके पैरों में गिर गया और यक्ष से रक्षा की याचना करने लगा|साधू ने परेशान होकर राजा से कारण पूछा तो राजा ने कहा की यह यक्ष बहुत तेज है जो भी काम मैं इसे करने को देता हूँ यह तुरंत पूरा करके और नया काम देने को कहता है|मेरे पास अब कोई काम ही नहीं बचा है जो मैं इससे करवाऊं इसलिए यह अब मुझे कहता है की या तो काम दो नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूँगा|साधू ने राजा से कहा की राजन तुम्हे इस यक्ष से न तो निपटना आया ना ही काम लेना आया|जब भी तुम्हारे पास काम नहीं था तुम्हें इस यक्ष को यह निर्देश देना चाहिए था की काम ख़त्म करने के बाद जब तक दूसरा काम करने को ना बोला जाये तुम इस राजमहल की सीढ़ियों पर चढ़ते उतारते रहना|
इस कथा में यहाँ पर यक्ष मन का ही प्रतीक है|अतः हमें अपने मन को कभी भी खाली नहीं रहने देना चाहिए|हीलिंग्स विध गॉड कोर्स ऐसी ब्रह्मविद्या है जिसमे हम अपने मन को साधने की तकनीक सीख सकते हैं,मन के द्वारा इच्छित कार्यों को सिद्ध कर सकते हैं, अपने मन के मालिक स्वयं बन सकते हैं|अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें|