chamtkari man

healings with god dohaसदियों से ऋषि,मुनि,वेद-शास्त्र मन के बारे में चर्चा करते आ रहे हैं| मानव मन अत्यंत शक्तिशाली है इसके द्वारा केवल शरीर ही नहीं बल्कि ब्रह्माण्ड भी संचालित होता है| मन के द्वारा ही मनुष्य जीवन पूरी तरह संचालित होता है| सभी कार्यों को मन ही सिद्ध करता है| शास्त्रों के अनुसार “एक ही साधे सब सधे” यानी एक मन को ही साध लिया जाए तो सारे कार्य स्वयं ही सिद्ध हो जाते हैं|लेकिन मन को जानने व उसे साधने की प्रक्रिया इतनी सरल भी नहीं है| यहाँ तक की मन को जानने व साधने के पीछे एक जीवन नहीं बल्कि अनेकों जन्म तक लग जाते हैं पर मनुष्य इस कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता| हम मन को जितना साधने की कोशिश करते हैं वह हमारी पकड़ से उतना ही दूर होता जाता है|आध्यात्मिकता में तो सारे कार्यों की सिद्धि के पीछे मन ही एक कारक बताया गया है| किसी भी कार्य को करने के पीछे सबसे पहले विचार मन में ही आता है| सृष्टि के प्रारम्भ से ही मन की महानता का गुणगान होता आ रहा है मन को साधना उसे स्वयं की मर्जी से संचालित कर पाना आसान ही नहीं नामुमकिन भी लगता है क्योंकि इस मन को साधने की प्रक्रियाएं,विधियां इतनी कठिन व कष्टकारी बताई गई हैं की मनुष्य चाह कर भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता मन को ठीक करने के लिए ही व्यक्ति पूजा,पाठ,भक्ति,व्रत,उपासना,ध्यान, इत्यादि करता है पर इतने प्रयासों के बाद भी उसे असफलता मिलती है मन के महत्व व उसके कार्य को और अधिक गहराई से जानने के लिए एक छोटी सी कथा का वर्णन करना आवश्यक हो गया है|
एक बार एक साधू चक्रवर्ती सम्राट के राज्य से गुजर रहे थे|राजा को जैसे ही इस बात का पता चला राजा स्वयं उस साधू को अपने महल में ले कर आ गए और उनका राजघराने के अतिथियो जैसा सम्मान और स्वागत किया|राजा ने हर तरह से सेवा करके उस साधू को प्रसन्न कर दिया|चलते समय साधू ने प्रसन्न होकर राजा को इच्छित वार मांगने को कहा तो राजा ने कहा की मुझे ऐसी वास्तु प्रदान करें जिसके द्वारा मैं जिस मुझे जिस भी कार्य को कराने की इच्छा हो वह पूरी कर दे| साधू ने प्रसन्न होकर उस राजा को अपना एक यक्ष (देवता विशेष) प्रदान किया और निर्देश दिया की इसे कोई न कोई कार्य अवश्य देते रहना क्योंकि अगर इसे कोई कार्य नहीं दोगे तो यह तुम्हें खाने को दौड़ेगा और अगर तुमने उसे ज्यादा समय तक काम नहीं दिया तो यह तुम्हें मार डालेगा और इतना कह कर वे साधू दूसरे राज्य में चल दिए|वापसी में साधू राजा का हाल जानने के लिए फिर से उसी राज्य से गुजरे|साधू को देखते ही राजा उनके पैरों में गिर गया और यक्ष से रक्षा की याचना करने लगा|साधू ने परेशान होकर राजा से कारण पूछा तो राजा ने कहा की यह यक्ष बहुत तेज है जो भी काम मैं इसे करने को देता हूँ यह तुरंत पूरा करके और नया काम देने को कहता है|मेरे पास अब कोई काम ही नहीं बचा है जो मैं इससे करवाऊं इसलिए यह अब मुझे कहता है की या तो काम दो नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूँगा|साधू ने राजा से कहा की राजन तुम्हे इस यक्ष से न तो निपटना आया ना ही काम लेना आया|जब भी तुम्हारे पास काम नहीं था तुम्हें इस यक्ष को यह निर्देश देना चाहिए था की काम ख़त्म करने के बाद जब तक दूसरा काम करने को ना बोला जाये तुम इस राजमहल की सीढ़ियों पर चढ़ते उतारते रहना|
इस कथा में यहाँ पर यक्ष मन का ही प्रतीक है|अतः हमें अपने मन को कभी भी खाली नहीं रहने देना चाहिए|हीलिंग्स विध गॉड कोर्स ऐसी ब्रह्मविद्या है जिसमे हम अपने मन को साधने की तकनीक सीख सकते हैं,मन के द्वारा इच्छित कार्यों को सिद्ध कर सकते हैं, अपने मन के मालिक स्वयं बन सकते हैं|अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें|

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