bhupinderभपेंद्र कुमार प्रजापति अध्यात्मिक ज्ञान/कोर्सों को सिखाने एवं विभिन्न अध्यात्मिक,हीलिंग कोर्सों को डिज़ाइन करने के क्षेत्र में एक जाना-माना व्यक्तित्व है,इन्होने अध्यात्मिक विद्याओं का ज्ञान पाने को सरल बनाया है जो केवल गुरु-चेलावाद को आगे बढ़ाने के लिए और अपने आप को गुरु कहलवाने वाले लोगो के द्वारा जटिल बना दिया गया था, वे कहते हैं कि ईश्वर को पाना इतना ही आसान है जितना हवा पाना आसान है क्योंकि हरेक वस्तु ईश्वर का ही अंश है ईश्वर को अनुभव करने के लिए केवल जानकारी एवं दृष्टि कि आवश्यकता है, वे वेदों एवं शास्त्रों के इस उद्घोष “अहम् ब्रह्मास्मि” अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ का समर्थन करते हैं इस ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए उनहोंने ब्रह्मविद्या अथवा हेलिंग्स विध गॉड कोर्स का रूपांकन किया है

वे मानते हैं कि सभी जीव साइकिक अथवा मानसिक होते हैं क्योंकि यह पूरा जगत एक अनुभव अथवा एहसास है परन्तु हम में से अधिकतर लोग इस बात से अनजान हैं,इसके लिए वे यह सोच रखते हैं कि अगर हम अनजान नहीं होते तो जीवन के विभिन एहसासों का क्या प्रयोजन रह जाता?
वे मानते हैं कि हममें से लगभग हर एक कि षष्ठेंद्री विकसित होती है जैसे कि हमें मनस पटल पर दिखाई देना,एहसास होना या सुनाई देना इत्यादि होता है पर हममें से अधिकतर लोग इन मानसिक उपहारों को नियंत्रित करना नहीं जानते और इस वजेह से ये लोग अपने जीवन में नुकसान झेलने का अनुभव करतें हैं क्योंकि वे अनजाने में दूसरों से,वातावरण से या दूसरे क्षेत्रों से हरेक विचार या ऊर्जा को ग्रहण कर लेते हैं यह नहीं समझ पाते कि यह उनके लिए अनवांछित है और उन्हें इनसे दूर रहना चाहिए और केवल उन्ही चीजों को ग्रहण करना चाहिए जो वंचित हैं एवं हितकर है

कृपया मानसिक यानि साइकिक और अंतःप्रज्ञा का अंतर समझ लें साइकिक वे होतें हैं जो अपने आस पास आने वाले हरेक विचार या ऊर्जा को यह जाने बिना पढ़ लेते हैं या ग्रहण कर लेते हैं कि वह वांछनीय है अथवा अवांछित है और अंतःप्रज्ञा वे होते हैं जो वांछनीय ऊर्जा का भेद समझ कर केवल वांछनीय विचार या ऊर्जा को ग्रहण करते हैं

श्री भूपेंद्र कुमार प्रजापति जी नें जीवन में कई अध्यात्मिक अनुभव किये हैं,इन अनुभवों में कई बार मृत्यु की समीपता के अनुभव शामिल हैं,आत्म ज्ञान या मोक्ष पाने कि चाह में इन्होंने बहुत कुछ सीखा जिनमें ज्योतिष,हस्त-रेखा,वास्तु-शास्त्र,अंक-शास्त्र,फंग-श्वे,टैरो-कार्ड,मंत्र शास्त्र,कर्मकाण्ड, मैडिटेशन,योग,प्राणायाम,इत्यादि विद्यायें और ब्रह्मविद्या प्रमुख हैं
पिछले कुछ वर्षों से वे विभिन्न अध्यात्मिक विषयों को सिखा रहे हैं,इन्हें अन्तः प्रज्ञा किस प्रकार कार्य करती है इसका भरपूर ज्ञान है और इसे किस प्रकार आसानी से विकसित करके इस्तेमाल किया जाए,इसे सिखाने में महारथ हासिल है,इनके शिष्य इनके पढ़ाने के ढंग कि खूब सराहना करतें हैं,ये गुरु चेलावाद से दूर हैं क्योंकि ये मानते हैं कि अधिकतर लोग जो इस परंपरा को चला रहे हैं वे अपने शिष्यों को बेवक़ूफ़ बना कर झूठा अहम् एवं गर्व हासिल करते हैं जो अध्यात्मिक उचाइयां प्राप्त करने में बाधक हैं,इन्होने ब्रह्मविद्याओं पर कुछ कोर्स रूपांकित किये हैं एवं इनमें हीलिंग्स विध गॉड का नाम शामिल है और भी बहुत से कोर्स कतार में हैं और कुछ एक माह में उपस्थित हो जायेंगे,समाज में व्याप्त ज्वलंत परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इन्होंनें नारियों कि सुरक्षा से सम्बंधित कोर्स रूपांकित किया है,वर्त्तमान में व्याप्त बहस एवं महिलाओं के प्रति छेड़खानी और बलात्कार कि घटनाओं के कारण एवं इन घटनाओं पर लोगों कि सोच के कारण इन्होंने यह कोर्स रूपांकित किया है क्योंकि समाज कि इस सोच के कारण कि अपराध के खिलाफ लड़ना है नारियों के खिलाफ और नए-नए जुर्म देखने को मिल रहे हैं क्योंकि सामूहिक चेतना फ़ैल गयी है क्योंकि अपराध से लड़ने के लिए अपराध यानि अपराधी और पीड़ित भी होना चाहिए इस कारण नए-नए क़ानून लागू किये जा रहे हैं एवं नयी तरह के अपराध भी अपना चेहरा दिखा रहे हैं

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