healings with god
क्या आप अपने जीवन मे कुछ हट कर करने की चाह रखते हैं परंतु यह चाह केवल एक सपना बन कर ही रह गई है? क्या आपको लगता है कि कोई बाहरी बाधा आपको सफल नहीं होने देना चाह रही है? क्या आपको यह आशंका रहती है कि कोई शत्रु-बाधा या कोई श्राप, किया-कराया, बुरी-नजर, जादू-टोना, इत्यादि आपको परेशान कर रहा है? इन सभी बाधाओं को ध्वस्त करने मे माँ काली अथवा धूमावती तुरंत प्रभाव दिखाती हैं। धूमावती देवी का स्वरूप ही इस बात का संकेत देता है कि वे नाकारात्मक शक्तियों को ध्वस्त करने मे समर्थ हैं। देवी के हाथ मे सूप(छाज) और ध्वजा मे कौवा दोनो यह दर्शाते हैं। सूप धान को साफ करने के काम आता है,यानि धान मे जो कंकर-पत्थर, धूल, कीडे, और बेकार की चीजें होती हैं उन्हें अलग करने का काम सूप करता है।
माँ धूमावती तुरंत प्रभाव दिखाती हैं और हर प्रकार से रक्षण करती हैं।हर प्रकार के काले-जादू, दुःख, उदासी, चिड्चिडेपन, रुदन, दरिद्रता, श्राप, त्रासदी, भूत-प्रेत इत्यादि बाधाओं को दूर करने के लिए माँ धूमावती को याद किया जाता है।आध्यात्मिक मार्ग मे उन्नति चाहने वाले लोगों के लिए धूमावती माँ का आशीर्वाद जरूर ग्रहण करना चाहिए।
ज्योतिष विद्या के अनुसार अगर किसी को उपर्युक्त परेशानियाँ हो या जन्म-कुंडली में केतु ग्रह अगर खाराबी कर रहा हो या उस ग्रह की दशा चल रही हो तो धूमावाती देवी कष्टों का निवारण कर सकती हैं।
माँ धूमावती की साधना वैसे तो बहुत कठिन ऐवँ दुरुह है, जरा सी भूल से मुसीबत आ सकती है और प्राण संकट मे पड सकते हैं। इसका पर्याय यह है की माँ धूमावती की सिद्धि प्राप्त किसी साधक से अगर माँ धूमावती की पूजा कराई जाए और उन्होंसे ही सिद्ध करा कर घर मे यंत्र स्थापित किया जाए या धारण किया जाए तो पूर्ण लाभ मिल सकता है।
‘आद्यानंद’ श्री भूपेंद्रकुमार जी हीलिंग्स विध गॉड कोर्स के रचेता हैं, निरंतर 7 वर्षों तक निराकार परमात्मा से जुडे रहने के बाद, निराकार परमेश्वर की प्रेरणा, निर्देश एवँ आशिर्वाद के द्वारा दश महाविद्याओं की कृपा एवँ सिद्धि प्राप्त करने के बाद लोगों को माँ धूमावती की कृपा प्राप्त कराने के उद्देश्य से धूमावती देवी की गुह्य पूजा का आयोजन कर रहे हैं, पूजा के द्वारा यंत्र सिद्धि भी होगी। इच्छुक जन पूजा के लाभ एवँ यंत्र प्राप्त करने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।
यहाँ पर हम एक व्यक्ति के जीवन में इन सिद्ध कवच और यंत्रों के द्वारा घटी सच्ची घट्ना का जिक्र कर रहे हैं, व्यक्ति का नाम बदल दिया गया है।
ईशा को ये परेशानियाँ जन्म से नहीं थीं। वह एक सीधी-साधी लडकी थी जो हँसती खेलती रहती थी।जब वह 16-17 वर्ष की हुई तब से परेशानियाँ बढती चली गईं। उसकी माँ को गले मे कैंसर हो गया था जो बढता चला गया।घर मे भी कलह-क्लेश बढता चला गया। उसके पिता शुरु से ही शराब पीने के आदी थे पर अब वे शराब के नशे मे दिन-रात धुत्त रहने लगे और घर मे लडाई-झगडा करने लगे।
ईधर ईशा जवान होने लगी और कब 25 वर्ष बीत गए पता ही नहीं चला। ईशा के लिए शादी का कोई रिश्ता नहीं आया।ज्योतिषि इत्यादि से पूछने पर पता चला कि ग्रह खराब हैं और किसी ने कुछ करा दिया है जिसकी वजह से दिक्कतें बढती जा रही हैं। कहीं और पूछने पर पता चला कि कोई प्रेत-बाधा है या पित्र-बाधा है। किसी ने बताया कि देवी-देवता सम्बंधी दोष है। खूब उपाय किये पर कोई लाभ नहीं हुआ।उधर उसकी माँ की हालत खूब बिगडती चली गई डॉकटरों ने जवाब दे दिया और ईशा की माँ का देहांत हो गया।
ईशा अब लगभग 27 वर्ष की हो गई थी। माँ के मरते ही बडे भाई और भाभी ने रंग बदलना शुरु कर दिया और सारी जमीन-जायदाद पर कब्जा कर लिया।ईशा और उसके छोटे भाई को भाईया और भाभी ने घर से निकाल दिया। मजबूर होकर दोनों किराए के मकान मे रहने लगे। जैसे-तैसे वे अपना गुजारा चलाने लगे। दोनो ने मेहनत करके नौकरी ढूंढ ली और सोचने लगे कि अब दिन फिर जाएँगे पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। ईशा को टी बी की शिकायत हो गई और सेहत घटने लगी। इधर टी बी का लम्बा ईलाज चला और ईशा का शरीर पूरी तरह मुर्झा गया।
इसके ऊपर मुसीबत यह हुई की ईशा की माँ की आत्मा ईशा पर आने लगी और उसे मुक्ति पाने के लिए परेशान करने लगी। पैसो की पहले ही कमी थी और अब पैसा दवाई और उपरी ईलाज मे खर्च होने लगा।अब एक और परेशानी ने ईशा को घेर लिया और वह थी उसकी महावारी का बंद होना।ईशा अब बुरी तरह टूट चुकी थी।
अचानक एक दिन उसे ‘आद्यानंद’ श्री भूपेंद्र जी के बारे मे पता चला और वह अपनी परेशानी का हल जानने उनके पास पहुँची। श्री भूपेंद्र जी ने ध्यान लगाया और बताया कि आपकी परेशानियों का हल माँ महा-काली कर सकती हैं और उन्होंने जैसे ही महाकाली का आहवान कर बुलाया और ईशा को आशीर्वाद दिलवाया ईशा को तुरंत अच्छा महसूस होने लगा।श्री भूपेंद्र जी ने कहा की अगर माँ काली के एक रूप धूमावती का अनुष्ठान कर उनका कवच रूपी यंत्र धारण कराया जाए तो आपकी परेशानियों का हल हो सकता है। ईशा ने बात मान ली और श्री भूपेंद्र जी ने अनुष्ठान करके ईशा को बुलाया और कवच रूपी यंत्र धारण करा दिया।
अग़ले दिन ईशा ने बताया कि सपने मे रात भर उसकी माँ उसे मुस्कुराते हुए दिखाई दी और उसे कुछ कपडे भेंट किए, साथ ही बहुत दिनो बाद वह तरो-ताजा महसूस कर रही है और उसका मन भी आज बहुत प्रसन्न है। 5 दिन बाद ईशा की सेहत काफी अच्छी हो गई थी और उसके चेहरे पर खूब चमक लौट आई थी। 10वे दिन ईशा को अचानक उल्टी आई और उसके थोडी देर बाद ही ईशा की महावारी(पीरियड्स) चालू हो गए। ईशा ने बताया कि अब उसे अपनी माँ का आवेश आना भी बंद हो गया है। पहले जो उसे झटके लगते थे बे भी लगने अब बंद हो गए हैं, अब उसको मन मे शांति रहती है और कुछ ना कुछ अच्छा होने की आस बनी रहती है।उसके लिए अब शादी के रिश्ते भी आने शुरु हो गए हैं।
‘आद्यानंद’ श्री भूपेंद्र जी से 09213099525, 09868540374, 011-64656844 पर सम्पर्क किया जा सकता है।