Vivah kee neev prem

healings with god vaivahik sukh

विवाह की नींव प्रेम

हर वैवाहिक स्त्री पुरुष सुखी व आनंदमय जीवन जीने की कल्पना व कामना करते हैं, वह इसे पाने के लिए भरपूर प्रयास भी करते हैं पर देखा गया है की अथक कोशिशो के बाद भी ऐसा कर पाने में वे असफल रहते है| सुखी वैवाहिक जीवन की नीव स्त्री और पुरुष रूपी जोड़े पर टिकी होती है, निम्नलिखित कथा में भी अमन और राशि उसी जोड़े को इंगित कर रहे हैं

आज अमन बहुत खुश था क्योंकि उसके ऑफिस में सभी काम समय से पहले खत्म हो गए थे, उसके बॉस नें सबके सामने आज उसके काम की जम कर तारीफ की, इस वजह से आज अमन हर्षित था क्योंकि बहुत समय के बाद सब काम जैसा वह चाह रहा था वैसे ही हो रहे थे|आज वह घर जाकर इस ख़ुशी को अपनी पत्नी राशि के साथ सेलिब्रेट करना चाहता था| उसे अपनी शादी के शुरुआती दिनों के खूबसूरत पल याद आ रहे थे| वह यही सोच रहा था की आज तो उसकी पत्नी खुश होकर उसकी तारीफों के पुल बाँध देगी और खूब प्रसन्न होगी| उधर घर पर अमन की पत्नी राशि का दिन बहुत ही खराब था क्योंकि आज काम वाली बाई नहीं आई थी और उसके इन्तेजार करने के बाद राशि को सारा काम खुद निपटाना पड़ा, वह सोच रही थी की अगर बाई पहले ही कह देती तो काम समय पर ख़त्म हो जाता| अभी वह काम से पूरी तरह निपटी भी नहीं थी की उसकी माँ का फोन आ गया और उसे पता चला की उसका छोटा भाई अभी भी कुछ काम नहीं कर रहा है बल्कि माँ बाप को शराब पीकर तंग करता है, और इस बात पर आज भी वहां पर कलेश हुआ है, और पिताजी आज फिर घर से रूठ कर चले गए हैं| राशि आज खूब गुस्से में है क्योंकि वह सोच रही है की अमन अगर खूब अमीर होता, या उसका अपना कोई बड़ा कारोबार होता तो आज वह उसे अपने काम-धंधे में सहारा देकर इस परेशानी को हमेशा के लिए समाप्त कर देती, परन्तु वह कैसे इस समस्या का हल करे क्योंकि अमन तो खुद ही एक नौकरी करता है|

शाम को अमन ने जैसे ही अपने ऑफिस के बारे में बताना शुरू किया, राशि ने गुस्से में भर कर कहा की तुम्हें तो अपनी खुशियों के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देता, हमेशा अपनी नौकरी को ही महत्त्व देते हो, तुम्हें तो मेरी कोई परवाह ही नहीं है, कब तक ऐसे ही नौकरी करते रहोगे, कोई बड़ा काम क्यों नहीं करते जिससे  खूब  पैसा  मिले, अमन को राशि से इस तरह की उम्मीद नहीं थी| अमन भी भड़क गया क्योंकि उसके साथ  ऐसा कई बार पहले भी हो चुका था की जब भी वह अपनी पत्नी से प्रेम की उम्मीद करता था उसके जीवन में कलह जरूर होता था, और उधर राशि भी दुखी थी क्योंकि अमन से उसने जो उम्मीदें लगा राखी थी वो पूरी नहीं हो पा रही थी|अमन और राशि के इस तरह के रोज-रोज के कलह कलेश से घर एक युद्ध का मैदान बन कर रह गया और उनका वैवाहिक जीवन परेशानियों से घिर गया और आखिर एक दिन गुस्से में आकर अमन ने कह ही दिया की इससे तो अच्छा है हम दोनों अलग हो जाएं क्योंकि अब यही एक उपाय बचा है…….सुख उन दोनों के लिए एक कल्पना बन कर रह गया|

वैवाहिक जीवन यदि सुख व आनंद से भरपूर होता है तो जीवन जीने का मजा ही कुछ और होता है इसके विपरीत यदि वैवाहिक जीवन में रोजमर्रा की कलह, कष्ट,धन-धान्य का आभाव,लड़ाई झगड़ा,मन-मुटाव,इत्यादि हो तो जीवन नरक सामान हो जाता है|पति पत्नी एक दुसरे के शत्रु तक बन जाते हैं बात कोर्ट कचेहरी तक पहुँच जाती है भरसक प्रयासों के बाद भी एक हँसता खेलता परिवार बिखर जाता है,टूट जाता है|ऐसी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा अहित बच्चों का होता है वे माता पिता से दूर रहने को विवश हो जाते हैं उनके प्यार से वंचित रह जाते हैं| यहाँ प्रश्न यह उठता है की इस संसार में वैवाहिक जीवन में सुखी रहना क्या इतना कठिन है या वह सुख हम कभी पा ही नहीं सकते आखिर हम अपने आप को इतना असहाय व लाचार समझने लगते हैं की सुख हमें मृग मरीचिका समान दिखाई पड़ता है की जिसे पाने के लिए हम चलते चले जाते हैं पर वह हमरी पहुँच में कभी आ ही नहीं पाता| ऐसे हालत में पति पत्नी तरह-तरह के उपाय खोजते हैं| जिनमे कर्म-कांड, पूजा-पाठ, व्रत-उपासना इत्यादि आम हैं| कई बार इन उपायों से सुख प्राप्त भी होता है पर ज्यादातर मामलों में असफलता ही हाथ लगती है,…… प्रेम ही ईश्वर है, अगर ईश्वर की पहचान हो जाये तो प्रेम की पहचान अपने आप ही हो जाती है……अगर अमन और राशि ने ईश्वर को पहचान लिया होता तो प्रेम की पहचान अपने आप ही हो जाती और उनके जीवन में ऐसी परिस्थितिया कभी उत्पन्न ही नहीं होती……ईश्वर या प्रेम को हीलिंग्स विध गॉड कोर्स के द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है और वैवाहिक जीवन को सुखी बनाया जा सकता है…..अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें